नात लिरिक्स

Har Khata Pe Sharamsar Hoon Main | Aye Khudaya Gunahgar Hoon Main

हर ख़ता पे शरमसार हूँ मैं | ऐ ख़ुदाया गुनहगार हूँ मैं

शायर: मुहम्मद नासिरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर ख़ता पे शरमसार हूँ मैंऐ ख़ुदाया ! गुनहगार हूँ मैं

जान कर, भूल कर जो किया हैहै पता मुझ को उस की सज़ा है

तेरी चौखट पे सर ना झुकायाबस ज़माने को अपना बनाया

तेरी रहमत ही तो आसरा हैतुझ से कहने को कुछ ना बचा है

मेरे सज्दों पे ऐसी नज़र करमैं अँधेरों में हूँ, तू सहर कर

इन दु'आओं में ऐसा असर देरब्ब-ए-का'बा मुझे माफ़ कर दे

नेकियों से मुझे जोड़ दे तूफिर मेरा रुख़ उधर मोड़ दे तूऐसा रस्ता मुझे तू दिखा

हर ख़ता पे शरमसार हूँ मैंऐ ख़ुदाया ! गुनाहगार हूँ मैं

मेरे सज्दों पे ऐसी नज़र करमैं अँधेरों में हूँ, तू सहर कर

माओं से बढ़ के है प्यार तेराऔर तेरे सिवा कौन मेरा ?गिर न जाऊँ, मुझे तू उठा

हर ख़ता पे शरमसार हूँ मैंऐ ख़ुदाया ! गुनाहगार हूँ मैं

जान कर, भूल कर जो किया हैहै पता मुझ को उस की सज़ा है

इन दु'आओं में ऐसा असर देरब्ब-ए-का'बा मुझे माफ़ कर दे

मेरे आँसू सवाली हैं तेरेगिर रहे हैं ये दामन पे मेरेअब तो सुन ले मेरी, ऐ ख़ुदा !

हर ख़ता पे शरमसार हूँ मैंऐ ख़ुदाया ! गुनाहगार हूँ मैं

जान कर, भूल कर जो किया हैहै पता मुझ को उस की सज़ा है

तेरी चौखट पे सर ना झुकायाबस ज़माने को अपना बनाया

तेरी रहमत ही तो आसरा हैतुझ से कहने को कुछ ना बचा है

मेरे सज्दों पे ऐसी नज़र करमैं अँधेरों में हूँ, तू सहर कर

इन दु'आओं में ऐसा असर देरब्ब-ए-का'बा मुझे मु'आफ़ कर दे

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