मीलाद की रौनक़ बढ़ती रहे, ये सारी दुनिया सजती रहेहम इश्क़ नबी का बढ़ाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना हैघर-घर में झंडे लगाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
चहेरों से ख़ुशियाँ छलकती हैं, नातों की कलियाँ महकती हैंहम महफ़िल-ए-नात सजाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
अर्श-ओ-कुर्सी-ओ-लोह-क़लम सब उन के नूर का सदक़ा हैजाबिर ये हदीस सुनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
झंडों की बहारें क्या कहना ! रैली में कतारें क्या कहना !दुश्मन को हम यूँ जलाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
दुनिया की सारी ख़ुश-हाली आक़ा के क़दमों से आईमक्के में आक़ा आते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
ये नात-ए-नबी से निस्बत है मसरूफ़ है एक दिहाई सेये दोनों निसार हैं आक़ा पर, ये उन के करम की कमाई हैये जाम वफ़ा पिलाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
हम दिल से जश्न मनाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना हैघर-घर में झंडे लगाते हैं, मीलाद-ए-नबी तो अपना है
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