हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
जुदा आप से रह के मुश्किल है जीनाये हसरत है दिल में कि देखें मदीनाइधर भी हो, आक़ा ! करम का इशाराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
मुसीबत हमारे सरों पे खड़ी हैकरम कर दो, आक़ा ! करम की घड़ी हैग़ुलामों ने रो रो के तुम को पुकाराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
गुनाहों से शर्मिंदा सर को झुकाएसभी उम्मती आस तुम से लगाएकरम हम पे कर दो, करम अब ख़ुदा-राहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
हवाएँ मुख़ालिफ़ हैं, आक़ा ! बचा लोहमें काली कमली में, आक़ा ! छुपा लोग़रीबों का कोई नहीं है सहाराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
परेशान दिल है, करम की नज़र होदु'आओं में, आक़ा ! हमारी असर होयही कह रहा है हर इक ग़म का माराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
दो, शुहदा-ए-कर्बल के प्यासों का सदक़ाहमें दे दो प्यारे नवासों का सदक़ा'अली, फ़ातिमा का 'अता हो उताराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
बदलते नहीं हैं ये हालात, आक़ा !मुसीबत से कटते हैं दिन-रात, आक़ा !ये कहता है, सरकार ! मँगता तुम्हाराहबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमारा
हबीब-ए-ख़ुदा ! लो सलाम अब हमाराशह-ए-अम्बिया ! लो सलाम अब हमारा
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