नात लिरिक्स

Gunahon Pe Hun Sharminda Ilahi Darguzar Kar De

गुनाहों पे हूँ शर्मिंदा इलाही दरगुज़र कर दे

शायर: क़ारी जमशेद जौहरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

गुनाहों पे हूँ शर्मिंदा, इलाही ! दरगुज़र कर देबड़ा मुजरिम हूँ मैं तेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

ख़ता कोई नहीं छोड़ी, कभी 'इस्याँ नहीं छोड़ाबस अब करता हूँ मैं तौबा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

खिलौना हाथ का अपने बना रक्खा है शैताँ नेबना ले अपना तू बंदा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

तेरे देने से, ऐ मौला ! तेरा तो कुछ न बिगड़ेगामगर बन जाएगा मेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

अगर मुझ पर तेरी रहमत न हो इक पल, ख़ुदा-वंदा !तो हो जाऊँगा मैं रुस्वा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

ख़ताएँ याद कर के आज मैं आँसू बहाता हूँतू रहमत का बहा दरिया, इलाही ! दरगुज़र कर दे

भिकारी बन के आया हूँ, तू अपने दर से, ऐ दाता !मुझे ख़ाली नहीं लौटा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

वो जिस पे चल के बंदों ने तेरा इन'आम पाया हैदिखा मुझ को भी वो रस्ता, इलाही ! दरगुज़र कर दे

सँवर जाए मेरी दुनिया, सँवर जाए मेरी 'उक़्बाजो हो जाए करम तेरा, इलाही ! दरगुज़र कर दे

नबी का वासिता दे कर, सदा दे है तेरा जौहररज़ा का दे दे परवाना, इलाही ! दरगुज़र कर दे

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