नात लिरिक्स

Hain Mehboob-e-Subhani Ghous-e-Azam Jilani

हैं महबूब-ए-सुब्हानी ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

नात ख़्वान: सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनीशायर: अदनान अक्सउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ौस पिया मेरे ग़ौस पिया ! ग़ौस पिया मेरे ग़ौस पिया !

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

हैं महबूब-ए-सुब्हानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीपीर हैं बेशक ला-सानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

हसनी सय्यिद इन के पिदर और हुसैनी हैं मादरदोनों तरफ़ से है इन का आ'ला रुत्बा, आ'ला घरदादा हैं इन के हैदर, ये सब वलियों के सरवरनिस्बत में हैं ला-फ़ानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

कहता था रब्ब-ए-अकबर, इन की ज़ुबाँ बन के अक्सरवर्ना इन की महफ़िल में माइक थे ना स्पीकरसुनते थे लाखों इंसाँ, पढ़ के सुनाते थे जी हाँजब आयात-ए-क़ुरआनी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

जिस पे नज़र कर देते हैं, ख़ाली को भर देते हैंचोरों को भी दम भर में रब का वली कर देते हैंजो इन के हो जाते हैं, दुनिया पर छा जाते हैंकरते हैं यूँ सुल्तानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

जैसे हो माह-ए-मुबीं, ऐसी है पुर-नूर जबींदेखा ना होगा दुनिया ने ऐसा जमील और ऐसा हसींहैदर की तस्वीर हैं ये, सब पीरों के पीर हैं येहैं महबूब-ए-सुब्हानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

इस के हामी रब के शेर, इस बेड़े की ख़ैर ही ख़ैर'अक्स भी इक इस का शा'इर और सना-ख़्वाँ इस के ढेरफ़ज़्ल-ओ-करम का रेला है, ये तो क़ादरी बेड़ा हैइस बेड़े के हैं बानी ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानीग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी, ग़ौस-ए-आ'ज़म जीलानी

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