नात लिरिक्स

Ghaus Piya Ke Pyare Qadam Ka Rutba Hi Kuchh Aisa Hai

ग़ौस पिया के प्यारे क़दम का रुत्बा ही कुछ ऐसा है

नात ख़्वान: सय्यिद मुहम्मद नूरानी अशरफ़ अल-जीलानीशायर: सय्यिद मुहम्मद नूरानी अशरफ़ अल-जीलानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ौस पिया के प्यारे क़दम का रुत्बा ही कुछ ऐसा हैसारे वली गर्दन पे उठाएँ, तलवा ही कुछ ऐसा है

आँख को रौशन करने वाला रौज़ा ही कुछ ऐसा हैफ़र्श पे हो फ़िरदौस का नक़्शा लगता ही कुछ ऐसा है

नूर-ए-'अली ज़हरा की तहारत, हसन-ओ-हुसैन के लख़्त-ए-जिगरमेरे नबी का अब्दुल क़ादिर बेटा ही कुछ ऐसा है

क़दम-ए-नबी पर सैर-ए-विलायत देख के दिल धक धक बोलेरंग नबी का उन की अदा में दिखता ही कुछ ऐसा है

ग़ौस-ओ-क़ुतुब, अब्दाल जहाँ के झोली पसारे आते हैंउन की सख़ावत का वलियों में चर्चा ही कुछ ऐसा है

चोर बने अब्दाल यहाँ से, मुर्दे हुए पल में ज़िंदाउन की करामत का, ऐ लोगो ! दर्जा ही कुछ ऐसा है

रोज़ किछौछा की धरती पर फ़ैज़ का दरिया बहता हैउन के करम का इस नगरी से रिश्ता ही कुछ ऐसा है

उन की वफ़ा का दम भर-भर के नूर की साँसें चलती हैंग़ौस के दर के कुत्तों में ये कुत्ता ही कुछ ऐसा है

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