नात लिरिक्स

Ghaus-e-Azam Samne Aa Jaiye | Ghous-e-Azam Samne Aa Jaiye

ग़ौस-ए-आज़म सामने आ जाइए

नात ख़्वान: महमूद रज़ा क़ादरीशायर: मख़्दूम जमालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म को बना कर अपना पीर, दस्त-गीरला-तख़फ़ की छाओं में आ जाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

दे रहा है इक सदा मुनकर-नकीर, दार-ओ-गीर'आशिक़ान-ए-ग़ौस मत घबराइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

शाह बन ने का अगर अरमान है, यान हैग़ौस-ए-आ'ज़म के गदा बन जाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

जोड़ कर रिश्ता मुहय्युद्दीं के साथ, पी के साथसाथ बख़्शिश की सनद भी पाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

एक दर उन का मिला तो सब मिला, रब मिलादर-ब-दर की ठोकरें क्यूँ खाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

क़ादरी बन ने का मतलब है यही, हाँ यहीनाम अपना ख़ुल्द में लिखवाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

क़ादरी मय-ख़ाना हर-दम है खुला, बरमलापीजिए औरों को भी पिलवाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

मिल गया है ग़ौस का ख़ान-ए-करम, क्या है ग़मउन के टुकड़े, उन का सदक़ा खाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

ऐ जमाली ! ग़ौस-ए-आ'ज़म हैं तो बस, पेश-ओ-पससरकशान-ए-वक़्त को बतलाइए, आइए

ग़ौस-ए-आ'ज़म ! सामने आ जाइए, आइएबे-सुकूनी की दवा फ़रमाइए, आइए

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