नात लिरिक्स

Ghaus-e-Azam Ka Darbar Allah Allah Kya Kehna

ग़ौस-ए-आज़म का दरबार अल्लाह अल्लाह क्या कहना

नात ख़्वान: सय्यिद फ़ुर्क़ान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !बग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

तुम हो हमारे, हम हैं तुम्हारे, तुम हो नबी के प्यारेदरबार-ए-नबी में ग़ौस-ए-आ'ज़म टूटे दिलों के सहारेउजड़ों को कर दे गुलज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !बग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

चोर को पल में वली बनाया, नज़र से बिगड़ी बनाईडूबी कश्ती बारह बरस की पल में पार लगाईबुढ़िया कहती थी हर बार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !बग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

क़ुतुब, औलिया, ग़ौस, क़लंदर, एक से एक हैं बढ़ करसारे औलिया लेने सलामी आए ग़ौस के दर परवो हैं वलियों के सरदार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !बग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

ऐसे ग़ौस का है ये हाफ़िज़, छूटे न हाथ से दामनबिगड़े काम बनाए आक़ा, क़ुर्बां उन पे तन-मनवो करते हैं बेड़ा पार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !बग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह ! अल्लाह ! क्या कहना !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।