नात लिरिक्स

Ghareeb Aae Hain Dar Par Tere Ghareeb-Nawaaz

ग़रीब आए हैं दर पर तेरे ग़रीब-नवाज़

नात ख़्वान: सय्यिद अब्दुल क़ादिर क़ादरीशायर: मुहद्दिस-ए-आ'ज़म-ए-हिन्दउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़रीब आए हैं दर पर तेरे, ग़रीब-नवाज़ !करो ग़रीब-नवाज़ी, मेरे ग़रीब-नवाज़ !

तुम्हारे दर की करामत ये बारहा देखीग़रीब आए हैं और हो गए ग़रीब-नवाज़

लगा के आस बड़ी दूर से मैं आया हूँमुसाफ़िरों पे करम कीजिए, ग़रीब-नवाज़ !

तुम्हारी ज़ात से मेरा बड़ा त'अल्लुक़ हैकि मैं ग़रीब बड़ा, तुम बड़े ग़रीब-नवाज़

न मुझ सा कोई गदा है, न तुम सा कोई करीमन दर से उठूँगा बे कुछ लिए, ग़रीब-नवाज़ !

हुज़ूर अशरफ़-ए-सिमनाँ के नाम का सदक़ाहमारी झोली को भर दीजिए, ग़रीब-नवाज़

ज़माने भर से मुझे कर दिया ग़नी, सय्यद !मैं सदक़े जाऊँ तेरी जोग के, ग़रीब-नवाज़ !

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