नात लिरिक्स

Ghamzadon Ko Hansane Kufr-o-Zulmat Mitane Mere Shamsudduha Aa Gaye

ग़म-ज़दों को हँसाने कुफ़्र-ओ-ज़ुल्मत मिटाने मेरे शम्सुद्दुहा आ गए

नात ख़्वान: रज़ा हुसैन कलकत्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़म-ज़दों को हँसानेकुफ़्र-ओ-ज़ुल्मत मिटानेमेरे शम्सुद्दुहा आ गए

लोग गुमराह थे, कुफ़्र का दौर थाहर तरफ़ ज़ालिमों का बड़ा ज़ोर थाबेटियाँ दफ़्न होती थीं ज़िंदाआदमी बन गया था दरिंदाजग में रहमत लुटानेबेटियों को बचानेदेखिए मुस्तफ़ा आ गए

क्या बयाँ मैं करूँ मर्तबा ग़ौस काख़ुत्बा पढ़ते हैं सब औलिया ग़ौस कादीन-ए-हक़ का वो सच्चा मुहाफ़िज़जो शिकम में हुआ माँ के हाफ़िज़वो हैं पीरों के पीरबन के रौशन-ज़मीरमेरे ग़ौस-उल-वरा आ गए

इस्म-ए-सरवर हुआ ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँदीन-ए-हक़ के लिए आए हिन्दुस्ताँभूले भटके को रस्ता दिखानेकाफ़िरों को मुसलमाँ बनानेमच गई खलबलीबन के हिन्दल वलीमेरे ख़्वाजा पिया आ गए

शिर्क-ओ-बिदअत का जाला बिछाया गयाभोले-भालों को उस में फँसाया गया'इल्म-ओ-'इरफ़ाँ का दरिया बहा कररब ने भेजा रज़ा को बना करनज्दियत को मिटानेसुन्नियत को बचानेमेरे अहमद रज़ा आ गए

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