नात लिरिक्स

Dushman-e-Ala-Hazrat Se Mat Pyar Kar | Jo Raza Ka Nahin Wo Hamara Nahin

दुश्मन-ए-आला-हज़रत से मत प्यार कर | जो रज़ा का नहीं वो हमारा नहीं

नात ख़्वान: फ़रहान बरकातीशायर: फ़रहान बरकातीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहींउस पे मत डालना दोस्ती की नज़रजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

आ'ला हज़रत से जलना ये चिड़ना तेराहश्र में यूँ हुवा तो करेगा तू क्यादेख कर तुझ को कह दें जो ख़ैर-उल-बशरजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

बात हक़ है तो डरने की क्या बात हैहक़-त'आला की रहमत तेरे साथ हैहर जगह, हर क़दम पर ये ए'लान करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

क्यूँ कहूँ तुम से कुछ, क्यूँ सुनूँ तुम से कुछतुम 'अक़ीदे से कुछ, मैं 'अक़ीदे से कुछबहस की क्या ज़रुरत है अल-मुख़्तसरजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

जो रज़ा का नहीं, वो नबी का नहींजो नबी का नहीं, वो ख़ुदा का नहींबात ये कह रहा हूँ बहुत सोच करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

जिस को अहमद रज़ा की ग़ुलामी मिलीहर क़दम पे उसे नेक-नामी मिलीतू भी, फ़रहान ! खुल के ये ए'लान करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

दुश्मन-ए-आ'ला-हज़रत से मत प्यार करजो रज़ा का नहीं, वो हमारा नहीं

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