नात लिरिक्स

Duroodon Ki Shamma Labon Par Sajao | Andhera Mitane Huzoor Aa Rahe Hain

दुरूदों की शम्मा लबों पर सजाओ | अँधेरा मिटाने हुज़ूर आ रहे हैं

नात ख़्वान: अरशद इक़बाल अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दुरूदों की शम्मा' लबों पर सजाओअँधेरा मिटाने हुज़ूर आ रहे हैंउठो, सुन्नियो ! अपने दामन को भर लोमुक़द्दर जगाने हुज़ूर आ रहे हैं

ज़रा पढ़ के सल्ले-'अला या मुहम्मदघरों को सजाओ हुज़ूर आ रहे हैंदिल-ओ-जान कर दो सब उन के हवालेकि पलकें बिछाओ हुज़ूर आ रहे हैं

सुहानी घड़ी और पिछला पहर हैतबस्सुम-ब-दामा वो देखो क़मर हैमदीने के ज़र्रो ! सितारों से कहनाज़रा जगमगाओ हुज़ूर आ रहे हैं

हिरन क़ैद में रह के इठला रही थीये कह कह के बच्चों से बलखा रही थीमेरे प्यारे बच्चो ! चलो मुस्कुराओकि हम को छुड़ाने हुज़ूर आ रहे हैं

मु'अत्तर मु'अत्तर फ़िज़ा हो रही हैज़रूर आमद-ए-मुस्तफ़ा हो रही हैदुरूदों दु'आओं को पढ़ कर के, लोगो !मुक़द्दर जगाओ हुज़ूर आ रहे हैं

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