नात लिरिक्स

Dil Tadapne Laga Aankh Rone Lagi | Mustafa Jaan-e-Rehmat Ki Yaad Aa Gai

दिल तड़पने लगा आँख रोने लगी | मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

नात ख़्वान: सईद अख़्तर जोखनपुरीशायर: सईद अख़्तर जोखनपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दिल तड़पने लगा, आँख रोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गईजब घटा छाई बरसात होने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

उलझनों ने ज़माने की उलझा दियामेरे अपनों ने भी मुझ को ठुकरा दियादुनिया ता'नों के नश्तर चुभोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

कौन हमदर्द है मेरा, जाऊँ कहाँसोचता था सुनाऊँ किसे दास्ताँज़िंदगी ग़म के मोती पिरोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

फ़िक्र का सारा पानी उतरने लगाग़म के दरियाओं से मैं उभरने लगाकश्ती-ए-ज़िंदगी जब डुबोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

ये मोहब्बत है, इस में तड़पना भी हैदेर है पर मदीने को जाना भी हैथक के जब मुफ़्लिसी रो के सोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

ऐ स'ईद ! 'इश्क़ में ये मक़ाम आ गयामेरे होंटों पे तयबा का नाम आ गयायाद तयबा की पलकें भिगोने लगीमुस्तफ़ा जान-ए-रहमत की याद आ गई

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