नात लिरिक्स

Dil-o-Nigaah Ki Duniya Nai Nai Hui Hai

दिल-ओ-निगाह की दुनिया नई नई हुई है

शायर: इफ़्तिख़ार हुसैन आरिफ़उपलब्ध: हिंदी

दिल-ओ-निगाह की दुनिया नई नई हुई हैदुरूद पढ़ते ही ये कैसी रौशनी हुई है

मैं बस यूँ ही तो नहीं आ गया हूँ महफ़िल मेंकहीं से इज़्न मिला है तो हाज़री हुई है

जहान-ए-कुन से उधर क्या था ? कौन जानता है ?मगर वो नूर के जिस से ये ज़िंदगी हुई है

हज़ार शुक्र ! ग़ुलामान-ए-शाह-ए-बत़हा मेंशुरुअ' दिन से मेरी हाज़री लगी हुई है

बहम थे दामन-ए-रहमत से जब तो चैन से थेजुदा हुए हैं तो अब जान पर बनी हुई है

ये सर उठाए जो मैं जा रहा हूँ जानिब-ए-ख़ुल्दमेरे लिए मेरे आक़ा ने बात की हुई है

मुझे यक़ीं है वो आएँगे वक़्त-ए-आख़िर भीमैं कह सकूँगा ज़ियारत अभी अभी हुई है

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