नात लिरिक्स

Dil-e-Ushshaq Mein Yun Azmat-e-Siddiq-e-Akbar Hai

दिल-ए-उश्शाक़ में यूँ अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

नात ख़्वान: मुहम्मद बिलाल रज़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इमाम-उल-मुस्लिमीन ! ख़लीफ़तुल-मोमिनीन !इमाम-उल-मुस्लिमीन ! ख़लीफ़तुल-मोमिनीन !

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

रसूलान-ए-सलफ़ में जो है रुत्बा ज़ात-ए-अहमद कासहाबा में कुछ ऐसी वुक़'अत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

शरफ़ हासिल कसीर असहाब को हिजरत का है लेकिननबी की इक़्तिदा में हिजरत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

ख़ुदा की राह में असबाब-ए-दुनिया सब लुटा डालाकि हुब्ब-ए-मुस्तफ़ा ही दौलत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

वो पहलु-ए-नबी में आज भी आराम-फ़र्मा हैंजहाँ में ये मक़ाम-ए-रिफ़'अत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

नबी के 'इश्क़ में भी हज़रत-ए-बू-बक्र कामिल हैंरशीद ! हम को तो यूँ ही उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

दिल-ए-'उश्शाक़ में यूँ 'अज़मत-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर हैकि क़ल्ब-ए-मुस्तफ़ा में उल्फ़त-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर है

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