डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैंहर हाल में लड़ते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
रातों को मुसल्ले पर और दिन को सर-ए-मैदांदुश्मन से निमटते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
इस आरज़ी दुनिया को ख़ातिर में नहीं लातेउक़्बा को समझते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
जो रब की मोहब्बत में अव्वल शब की दुल्हनको छोड़ के चलते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
डरते हैं न झुकते हैं, वो मेरे सहाबा हैं
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