नात लिरिक्स

Dariya Hai Hamara

दरिया है हमारा

नात ख़्वान: सलमान रज़ा अशरफ़ीशायर: मशहूद रज़ा बलरामपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार ! ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार !ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार ! ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार !

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमाराग़ाज़ी के वफ़ादारों ने मिल के पुकारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

मशकीज़ा लिए दरिया पे जाऊँगा, सकीना !हर हाल में और पानी मैं लाऊँगा, सकीना !फिर अपने ही हाथों से पिलाऊँगा, सकीना !बातिल ने मगर कह के यही तीर से मारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

आक़ा के दुलारों को सताने पे तुले होहैदर की निशानी को मिटाने पे तुले होलालच में हो दुनिया के ख़ज़ाने पे तुले होतुम जिस पे अकड़ते हो वो सदक़ा है हमारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

इतना न तकब्बुर करो, ऐ तख़्त-नशीनो !औक़ात में अपनी रहो वर्ना,ऐ ल'ईनो !इक वार में वल्लाह मैं कहता हूँ, कमीनो !इस जंग का नक़्शा ही बदल जाएगा सारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

ज़हरा के दुलारों का अगर सदक़ा न पातेकिस के दर-ए-दौलत पे ये दामन को बिछातेतकलीफ़ जो दिल में है किसे जा के सुनातेतुम सब का मगर होता है इस दर से गुज़ारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

ऐ बुग़्ज़ के मारो ! ज़रा तुम होश में आओतुम हम को ज़र-ओ-माल ख़ुदा-रा न दिखाओऐ ज़ालिमो ! मैं पूछ रहा हूँ ये बताओइस गुलशन-ए-हस्ती में भला क्या है तुम्हारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

जिस वक़्त 'अलम-दार ने तलवार उठाईघमसान की कर्बल में हुई ख़ूब लड़ाईऔर ज़ालिम-ओ-जाबिर की हुई सख़्त पिटाईबे-ख़ौफ़ हर इक मर्द-ए-कलंदर ने पुकारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

बचपन से 'अली मौला के साए में रहा हूँऔर फ़ातिमा ज़हरा की दु'आओं से पला हूँये भूल के मत सोचना तुम सब से डरा हूँहिम्मत है तो तुम सामने आ जाओ दोबारादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

'अब्बास 'अलम-दार का जज़्बा है ये प्याराजुरअत है ग़ज़ब, कुफ़्र का ऐवान उजाड़ाकर्बल में कई लश्कर-ए-ज़ालिम को पछाड़ाऔर क़िल'आ-ए-बातिल को भी है जड़ से उखाड़ाकह कर यही इस्लाम के गुलशन को सँवारा'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रा

मशहूद रज़ा ! सर पे कफ़न बाँध के चलिएगुस्ताख़ के नर्ग़े में शब-ओ-रोज़ ये कहिएऐ मुन्किर-ए-इस्लाम ! ज़रा ध्यान से सुनिएबे-ख़ौफ़ 'अलम-दार के मतवालों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार के दीवानों का ना'रादरिया है हमारा, दरिया है हमारा

'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार'अब्बास 'अलम-दार 'अलम-दार 'अलम-दार

ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार ! ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार !ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार ! ग़ाज़ी 'अब्बास 'अलम-दार !

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