नात लिरिक्स

Darbar-e-Risalat Ki Kaisi Wo Ghadi Hogi

दरबार-ए-रिसालत की कैसी वो घड़ी होगी

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दरबार-ए-रिसालत की कैसी वो घड़ी होगीहस्सान के होंटों पे जब ना'त-ए-नबी होगी

बू-बक्र-ओ-'उमर होंगे, 'उस्मान-ओ-'अली होंगेहसनैन के नाना की क्या बज़्म सजी होगी

आक़ा हैं क़मर लेकिन असहाब सितारे हैंउस चाँद की हर जानिब तारों की लड़ी होगी

जाएँगे मदीने हम, ले जाएगा जब अल्लाहदिल सज्दा-कुना होगा, आँखों में झड़ी होगी

जब वादी-ए-ताइफ़ में रंगीन हुए जूते'अर्शों पे फ़रिश्तों के दिल पर भी बनी होगी

जब उहुद-ओ-बदर वाले आक़ा पे हुए क़ुर्बांख़ुश-ख़बरी फिर उन को जन्नत की मिली होगी

नशीद-ख़्वाँ:मुहम्मद अनस रहीमीसादिआ मुदस्सिर

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