दरबार-ए-मदीना सा दरबार नहीं मिलतासरकार-ए-दो-आलम सा सरकार नहीं मिलता
हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही सेतयबा का कोई ज़र्रा बे-कार नहीं मिलता
दरबार-ए-मदीना सा दरबार नहीं मिलतासरकार-ए-दो-आलम सा सरकार नहीं मिलता
ऐ मिस्र के बाज़ारो ! अच्छे हो बहुत लेकिनतयबा से हसीँ कोई बाज़ार नहीं मिलता
दरबार-ए-मदीना सा दरबार नहीं मिलतासरकार-ए-दो-आलम सा सरकार नहीं मिलता
जो गालियाँ सुन कर भी हर इक को दुआएं देढूंढे से भी इक ऐसा किरदार नहीं मिलता
दरबार-ए-मदीना सा दरबार नहीं मिलतासरकार-ए-दो-आलम सा सरकार नहीं मिलता
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