दर पे हाज़िर हैं हम, कीजिएगा करम, हम पे हर दमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
सुब्ह-ए-सादिक़ ये पैग़ाम लाई, लो सवारी मुहम्मद की आईडालियाँ झुक गईं, कलियाँ खिल गईं, बोली शबनमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
दर पे हाज़िर हैं हम, कीजिएगा करम, हम पे हर दमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
हूरें झूला झुलाने को आईं, जान-ओ-दिल से फ़िदा करने आईंझूला दे जाती हैं, लोरियाँ गाती हैं, हूरें हर दमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
दर पे हाज़िर हैं हम, कीजिएगा करम, हम पे हर दमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
तुम ने दुनिया में जल्वे दिखा कर, रौशनी की अँधेरों में आ करभूला भटका हुआ, राह-ए-हक़ पा गया, सारा 'आलमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
दर पे हाज़िर हैं हम, कीजिएगा करम, हम पे हर दमअस्सलाम ! ए रसूल-ए-मुअज़्ज़म !
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