नात लिरिक्स

Dar-e-Khwaja Pe Sawali Ko Khada Rehne Do

दर-ए-ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दो

नात ख़्वान: डॉ. हाफ़िज़ निसार अहमद मार्फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दर-ए-ख़्वाजा पे सवाली को खड़ा रहने दोसर नदामत से झुका है तो झुका रहने दो

मुझ को मिल जाएगा सदक़ा, मैं चला जाऊँगाकासा-ए-दिल मेरा क़दमों में पड़ा रहने दो

ख़ुद ही फ़रमाएँगे मुजरिम पे वो रहमत की नज़रमुझ को ख़्वाजा की 'अदालत में खड़ा रहने दो

छोड़ कर आप का दर अब मैं कहाँ जाऊँगाइस गदा को इसी साए में पड़ा रहने दो

रोज़-ए-महशर ये गुनहगार के काम आएगावारसी रंग चढ़ा है तो चढ़ा रहने दो

'अर्ज़ करता हूँ मैं रोज़ाना ये ख़्वाजा से, ख़लील !अपनी रहमत से जहाँ मेरा सजा रहने दो

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