नात लिरिक्स

Chashm-e-Nam Hai Har Ik Ahl-e-Imaan | Alvida Alvida Mahe Ramzan

चश्म-ए-नम है हर इक अहल-ए-ईमाँ | अलविदा अलविदा माह-ए-रमज़ाँ

उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चश्म-ए-नम है हर इक अहल-ए-ईमाँरो रो कहता है हर इक मुसलमाँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !अलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

किस-क़दर ख़ूबसूरत समाँ थादिल हर इक शख़्स का शादमाँ थाले के हमराह आया था ख़ुशियाँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तेरे आने की ही थी ये बरकतहो गया था कि ज़ौक़-ए-'इबादतबन के आया था तू एक मेहमाँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

तोहफ़ा-ए-मग़्फ़िरत ले के आयाफ़ाइदा ख़ूब सब ने उठायादर्स देते रहे अहल-ए-'इरफ़ाँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

क़द्र इस की नहीं कर सका मैंख़्वाब-ए-ग़फ़लत में सोया रहा मैंआख़िरत का न कर पाया सामाँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

अस्ल में ख़ुश ये सारा जहाँ थाफ़ैज़ का, ताज ! दरिया रवाँ थाफिर भी धो न सका दाग़-ए-'इस्याँअलविदा' अलविदा', माह-ए-रमज़ाँ !

नशीद-ख़्वाँ:तसनीम आरिफ़

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