नात लिरिक्स

Chamka Jo Sab Se Pahle Wo Taara Kahoon Tujhe | Tazmeen of Sarwar Kahun Ki Maalik-o-Maula Kahoon Tujhe

चमका जो सब से पहले वो तारा कहूँ तुझे | तज़मीन - सरवर कहूँ कि मालिक-ओ-मौला कहूँ तुझे

नात ख़्वान: ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्सम - शुऐब रज़ा वारसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चमका जो सब से पहले वो तारा कहूँ तुझेवज्ह-ए-वजूद-ए-आदम-ओ-हव्वा कहूँ तुझेदुनिया कहूँ कि मक़्सद-ए-दुनिया कहूँ तुझेसरवर कहूँ कि मालिक-ओ-मौला कहूँ तुझेबाग़-ए-ख़लील का गुल-ए-ज़ेबा कहूँ तुझे

वो बात मैं कहूँगा जो क़ुरआन ने कहीतुझ सा कोई हुआ है न होगा कभी कोईमैं ही नहीं, ये कहता है हर एक उम्मतीतेरे तो वस्फ़ 'ऐ़ब-ए-तनाही से हैं बरीहैराँ हूँ, मेरे शाह ! मैं क्या क्या कहूँ तुझे !

चौदह सौ साल हो गए, जारी हैं कोशिशेंइस रौशनी को रोक नहीं पाई बंदिशेंहर सम्त हो रही हैं अब हिकमत की बारिशेंअल्लाह रे ! तेरे जिस्म-ए-मुनव्वर की ताबिशेंए जान-ए-जाँ ! मैं जान-ए-तजल्ला कहूँ तुझे

सिद्दीक़ और 'उमर हैं वफ़ा में तेरी शबीहजूद-ओ-सख़ा में तेरी 'अता से ग़नी शबीहक़ुव्वत के बाब में हुए मौला 'अली शबीहज़हरा है लख़्त-ए-दिल तो हसन है तेरी शबीहज़ैनब का या हुसैन का बाबा कहूँ तुझे

मेरे रज़ा ने, नूर ! क़सीदा वो कह दियासुनते ही झूम जाते हैं जिस को सभी गदामुमकिन था जितना लफ़्ज़ों में, वो कह गए रज़ालेकिन रज़ा ने ख़त्म सुख़न इस पे कर दियाख़ालिक़ का बंदा, ख़ल्क़ का आक़ा कहूँ तुझे

कलाम:इमाम अहमद रज़ा ख़ान

तज़मीन:ग़ुलाम नूर-ए-मुजस्सम

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