नात लिरिक्स

Chalo Aao Chalte Nabi Ji Ke Gaon

चलो आओ चलते नबी जी के गाओं

शायर: हसन फ़ानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

वो ज़मज़म का पानी, वो का'बे की छाओंचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

सफ़ा और मरवा के दिलकश नज़ारेवो 'अरफ़ात ग़ार-ए-हिरा के किनारेवो ताइफ़ की संगलाख़ सी एक वादीजहाँ ख़ूँ से लबरेज़ थे मेरे हादीमैं देखूँ हलीमा के नूरानी घर कोकभी चूम पाऊँ मैं अस्वद हजर कोकभी हो ज़ियारत मुझे पा-ए-अक़्दसमैं देखूँ वो नक़्श-ए-नबी-ए-मुक़द्दसवो सोने से कंकर मैं दिल से लगाऊँचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

वो ज़मज़म का पानी, वो का'बे की छाओंचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

मुझे आब-ए-ज़मज़म का तोहफ़ा 'अता होस'ई की तड़प और जज़्बा 'अता होमुझे मुल्तज़म की हो सा'अत-नसीबीजहाँ रो के माँगूँ मैं तेरी फ़क़ीरीवो मक्के की बस्ती, वो का'बे की गलियाँवो ख़ाक-ओ-चमन, कोह-ए-दीदार तलियाँख़ुदा ! नेक मेरा ये कब से है अरमाँमैं देखूँ हुनैन और ख़ंदक़ का मैदाँख़ुदाया ! मुझे अपने दर पर बुला लोगुनाहों के दलदल से मुझ को बचा लोमैं का'बे का मंज़र हसीं देख पाऊँचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

वो ज़मज़म का पानी, वो का'बे की छाओंचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

मैं देखूँ मुहम्मद के रौज़े की जालीसलाम 'अर्ज़ करता मैं सरकार-ए-'आलीमैं देखूँ मनाज़िर भी जन्नत-बक़ी' केजहाँ साथी आराम-फ़रमा नबी केवो मैदान-ए-बद्र-ओ-उहुद के उजालेवो ग़ज़वात के दिन, वो तीर और भालेवो मस्जिद जो क़िब्ला था अक़्सा हमारातड़प है बहुत देखने का ख़ुदारातमन्ना है मेरी, मैं देखूँ मदीनामैं दौर-ए-नुबुव्वत का देखूँ क़रीनाख़ुदा मैं भी क़िस्मत को अपनी जगाऊँचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

वो ज़मज़म का पानी, वो का'बे की छाओंचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

मुहम्मद पे देखूँ मैं ईमान लातेसहाबा को जब्र-ओ-मशक़्क़त उठातेवफ़ाओं की बस्ती, मुहम्मद के वालीअहद की पुकारों में रूह-ए-बिलालीसहाबा को देखूँ फ़िदा जान करतेसर अपने नुबुव्वत पे क़ुर्बान करतेमैं देखूँ मदीने में शफ़क़त का मंज़रहैं असहाब सारे मेरे दिल के अंदरख़ुदा मेरी नस्लों में पैदा 'उमर कर'अली कर, तू मिस्ल-ए-ग़नी, बू-बकर करदु'आ रब से फ़ानी की है, मैं भी जाऊँचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

वो ज़मज़म का पानी, वो का'बे की छाओंचलो आओ चलते नबी जी के गाओं

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