नात लिरिक्स

Bu Bakar Siddiq Jaisa Koi Ho Sakta Nahin

बू-बकर सिद्दीक़ जैसा कोई हो सकता नहीं

नात ख़्वान: वक़ार उमर दंगराजशायर: ग़ुलाम क़ादिरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बू-बकर सिद्दीक़ जैसा कोई हो सकता नहींहै वफ़ा में बे-मिसल, दुनिया में उस जैसा नहीं

फूल ख़ुशबूदार सारे हैं रसूलुल्लाह केजो महक सिद्दीक़ ने दी ऐसी और देता नहीं

इक नबी इक यार था, दोनों तरफ़ ही प्यार थागर न आते ग़ार का रुत्बा बुलंद होता नहीं

दीद थी दीदार था, दीदार था बस प्यार थागोद में महबूब था, क्या यार ने चूमा नहीं

गुंबद-ए-ख़ज़रा में है आराम-फ़रमा बू-बकरदर खुला रौज़े का ख़ुद ही, वैसे ख़ुद खुलता नहीं

ग़ुलाम क़ादिर ! ये हमारा है 'अक़ीदा नज़रियाइज़ हुमा फ़िल-ग़ार जैसा कोई बन सकता नहीं

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