नात लिरिक्स

Bakht-e-Khufta Ne Mujhe Roze Pe Jaane Na Diya

बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता ने मुझे रोज़े पे जाने न दिया

शायर: मौलाना मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरीउपलब्ध: हिंदी

बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता ने मुझे रोज़े पे जाने न दियाचश्म-ओ-दिल सीने कलेजे से लगाने न दिया

आह क़िस्मत ! मुझे दुनिया के ग़मों ने रोकाहाए तक़दीर ! के तयबा मुझे जाने न दिया

पाँव थक जाते अगर, पाँव बनाता सर कोसर के बल जाता मगर ज़ोअ'फ़ ने जाने न दिया

सर तो सर जान से जाने की मुझे हसरत हैमौत ने हाए ! मुझे जान से जाने न दिया

हाल-ए-दिल खोल के दिल आह ! अदा कर न सकाइतना मौक़ा ही मुझे मेरी क़ज़ा ने न दिया

मेरे आ'माल का बदला तो जहन्नम ही थामैं तो जाता मुझे सरकार ने जाने न दिया

मेरे आ'माल-ए-सियाह ने किया जीना दूभरज़हर खाता, तेरे इर्शाद ने खाने न दिया

और चमकती सी ग़ज़ल कोई पढ़ो, ए नूरी !रंग अपना अभी जमने शोअ'रा ने न दिया

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