नात लिरिक्स

Aye Mah-e-Mubarak Tujhe Alwida Ho Ki Ab Tere Jane Ka Waqt Aa Gaya Hai

ऐ माह-ए-मुबारक तुझे अलविदा हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

नात ख़्वान: Asif Muaviaशायर: अशअर बुख़ारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया हैसमेटे हुए अपने दामन में रहमत, 'अता और बख़्शिश लिए जा रहा है

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

तू आया तो ज़ौक़-ए-'इबादत बढ़ा था, वो शौक़-ए-नवाफ़िल तिलावत बढ़ा थातेरे एहतिराम और हुर्मत की ख़ातिर, ख़ुदा ने भी शैताँ को क़ैदी किया है

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

कहाँ रब का मेहमाँ, कहाँ मेज़बानी, करे हक़ अदा कैसे ये ज़िंदगानीतेरा हक़ अदा हम से न हो सका पर तेरे सदक़े से ही करम की दु'आ है

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

ख़ुदाया ! हमें ऐसा जज़्बा 'अता कर कि बा'द-अज़ रमज़ान भी हो मुक़द्दरकरें जोश-ओ-जज़्बे से तेरी 'इबादत, वो जज़्बा जो रमज़ाँ में तू ने दिया है

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

ख़ुदा से दु'आ है कि मिल जाए म'आफ़ी, हो जन्नत 'अता नार से हो ख़लासीमिले फिर न शायद ये अश'अर को मौक़ा, हो मक़बूल या रब ! दु'आ इल्तिजा है

ऐ माह-ए-मुबारक ! तुझे अलविदा' हो कि अब तेरे जाने का वक़्त आ गया है

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