नात लिरिक्स

Aye Ilah Mujh Ko Wohi Mera Zamana De De

ऐ इलाह मुझ को वोही मेरा ज़माना दे दे

शायर: अमीन गीलानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

मेरे अल्लाह ! मैं क्या माँगूँ यही काफ़ी हैदर्द दे कर मुझे रोने का बहाना दे दे

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

ग़ैर के दर पे मैं क्यूँ जाऊँ सवाली बन करअपनी दहलीज़ पे मरने का ठिकाना दे दे

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

मैं ने क्या करनी है ले कर वो क़ुबा-ए-दारामुझ को कंबल वो अबू-ज़र का पुराना दे दे

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

दे दे वापस वोही अंदाज़ वोही शान मुझेख़ाक का फ़र्श तो पत्थर का सिरहाना दे दे

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

गाड़ कर नेज़ा मैं सो जाता था सहराओं मेंऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे दे

ऐ इलाह ! मुझ को वोही मेरा ज़माना दे देकब मैं कहता हूँ मुझे ताज-ए-शहाना दे दे

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