नात लिरिक्स

Apne Dar Par Apne Mangte Ko Bulayein Ghaus-e-Pak

अपने दर पर अपने मँगते को बुलाएँ ग़ौस-ए-पाक

नात ख़्वान: मदनी रज़ा अत्तारी, अज़ीम अत्तारी,उपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !

मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

हो रही हैं आप की हम पर 'अताएँ, ग़ौस-ए-पाक !क्यूँ न फिर हम आप के ना'रे लगाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !

है वो तेरा दबदबा कि तेरे नाम-ए-पाक सेथरथराते हैं सभी जिन्न-ओ-बलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !

आप मेरे दिल, जिगर में और आँखों में रहेंयाद बन कर मेरी नस-नस में समाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !

बे-वफ़ा हैं हम, निभा पाए न कुछ भी आप सेहश्र तक बस आप ही हम को निभाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !मुर्शिद मेरे ग़ौस-ए-पाक !

जाँ-कनी का वक़्त है, बहर-ए-'अली-उल-मुर्तज़ाअपने ख़ाकी के सिरहाने आप आएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !और अपनी दीद का शर्बत पिलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

अपने दर पर, अपने मँगते को बुलाएँ, ग़ौस-ए-पाक !

शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !शाह-ए-जीलाँ ! पीर-ए-पीराँ !

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