नात लिरिक्स

Allah Ki Raza Hai Mohabbat Hussain Ki | Ya Hussain Ibne Ali

अल्लाह की रज़ा है मोहब्बत हुसैन की | या हुसैन इब्न-ए-अली

नात ख़्वान: यूसुफ़ आज़ाद क़व्वालउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

अल्लाह की रज़ा है मोहब्बत हुसैन कीलिखता हूँ ख़ून-ए-दिल से शहादत हुसैन की

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

जब कर्बला में आए दुलारे बतूल केशेर-ए-ख़ुदा के ला'ल, नवासे रसूल के

चारों-तरफ़ से घेर लिया फ़ौज-ए-शाम नेये ज़ुल्म सय्यिदों पे किया फ़ौज-ए-शाम ने

इक ज़ख़्म दिल पे और भी गहरा लगा दियादरिया पे भी ल'ईनों ने पहरा लगा दिया

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

ज़ैनब ने जब निगाहों से देखा ये माजराआ कर कहा हुसैन से, भय्या ! सुनो ज़रा

करती हूँ इस ग़रीबी में इक आख़िरी सवालख़िदमत में ले के आई हूँ मैं अपने दोनों ला'ल

माना कि ये तुम्हारी बहन का क़रार हैंप्यारे हुसैन ! तुझ पे ये बच्चे निसार हैं

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

ज़ैनब की बात सुन के शह-ए-दीन रो दिएजैसे किसी ने रूह में नश्तर चुभो दिए

फ़रमाया, जाओ रन की इजाज़त भी हम ने दीइन को शहीद होने की 'इज़्ज़त भी हम ने दी

ज़ैनब ! तुम्हारे लाडले ख़ूँ में नहाएँगेये ला'ल हम से पहले ही जन्नत में जाएँगे

शब्बीर इतना कह के परेशान हो गए'औन-ओ-मुहम्मद आप पे क़ुर्बान हो गए

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

असग़र 'अली भी राही-ए-बाग़-ए-इरम हुए'अब्बास के भी नहर पे बाज़ू क़लम हुए

क़ासिम का सीना छिद गया, अकबर हुए शहीदराह-ए-ख़ुदा में सब ही दिलावर हुए शहीद

ज़हरा का सब्र छिन गया, हैदर का घर लुटाअफ़सोस ! कर्बला में पयंबर का घर लुटा

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

इक दर्द से इमाम का चेहरा उदास हैमहसूस हो रहा है कि का'बा उदास है

बच्चों का दुख है सीने में, फ़िक्र-ए-हरम भी हैऔर उस के साथ नाना कि उम्मत का ग़म भी है

शेर-ए-ख़ुदा के शेर की हालत 'अजीब हैवो ख़ूब जानते हैं शहादत क़रीब है

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

बीमार नौनिहाल को बिस्तर पे छोड़ करशब्बीर रन में चल दिए घोड़े को मोड़ कर

सीने में अपने जज़्बा-ए-ईमाँ लिए हुएनिकले हैं लब पे आयत-ए-क़ुरआँ लिए हुए

ज़ी-जाह रही 'अज़ीज़ न राहत 'अज़ीज़ थीउन को तो कर्बला में शहादत 'अज़ीज़ थी

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

दरिया बहा जो फ़ौज का प्यासे को देख करसब काँप उठे नबी के नवासे को देख कर

तीरों का मेंह बरसने लगा शाह-ए-दीन परख़ून-ए-हुसैन गिरने लगा जब ज़मीन पर

उस ख़ूँ को फ़रिस्तों ने दामन में ले लियाइक बूँद को भी रेत पे गिरने नहीं दिया

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

ज़ख़्मों से चूर हो गया जो मुर्तज़ा का ला'लसज्दे में सर झुका के कहा, रब्ब-ए-ज़ुलजलाल !

तेग़ों के साए में मेरा सज्दा क़ुबूल करये आख़िरी नमाज़ है, मौला ! क़ुबूल कर

इस तरह पूरा हो गया तक़दीर का लिखासूखे गले पे चल गया ख़ंजर ल'ईन का

उम्मत को यूँ बचाया शह-ए-बे-मिसाल नेसज्दे में सर कटा दिया ज़हरा के ला'ल ने

या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !या हुसैन इब्न-ए-'अली ! या हुसैन इब्न-ए-'अली !

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