नात लिरिक्स

Ajmer Ka Jab Ye Manzar Hai Baghdad Ka Manzar Kya Hoga

अजमेर का जब ये मंज़र है बग़दाद का मंज़र क्या होगा

नात ख़्वान: नूर अहमद नूर ख़लीलाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अजमेर का जब ये मंज़र है, बग़दाद का मंज़र क्या होगा !रहते हैं जहाँ नबियों के नबी वो शहर-ए-मुनव्वर क्या होगा !

वो कलमा पढ़ाएँ चोरों को, मुर्दों को उठा दें ठोकर सेजब ग़ौस में इतना पावर है, सरकार का पावर क्या होगा !

हैं आज भी अपने उलझन में, उठते हैं सवाल अक्सर मन मेंजो अपना जनाज़ा ख़ुद ही पढ़े वो साबिर-ए-कलियर क्या होगा !

जब हुस्न था उन का जल्वा-नुमा, अनवार का 'आलम क्या होगा !हर कोई फ़िदा है बिन देखे, दीदार का 'आलम क्या होगा !

इक सम्त 'अली, इक सम्त 'उमर, सिद्दीक़ इधर, 'उस्मान उधरइन जगमग जगमग तारों में माहताब का 'आलम क्या होगा !

चाहें तो इशारों से अपने काया ही पलट दें दुनिया कीये शान है उन के ग़ुलामों की, सरदार का 'आलम क्या होगा !

दुल्हन जो लगा ले तो उस की नस्लें भी मु'अत्तर हों जाएँआक़ा का पसीना ऐसा है तो जिस्म-ए-मु'अत्तर क्या होगा !

वो सज्दा करे तो सज्दे में यूँ रात मुकम्मल हो जाएबेटी है नबी की जब ऐसी, नबियों का वो सरवर क्या होगा

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