नात लिरिक्स

Aye Habib Ahmad-e-Mujtaba Dil-e-Mubtala Ka Salam Lo

ऐ हबीब अहमद-ए-मुज्तबा दिल-ए-मुब्तला का सलाम लो

नात ख़्वान: वासिफ़ रज़ा नूरीशायर: मौलाना मुहम्मद सईद एजाज़ कामटवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ हबीब अहमद-ए-मुज्तबा ! दिल-ए-मुब्तला का सलाम लोजो वफ़ा की राह में खो गया, उसी गुम-शुदा का सलाम लो

मैं तलब से बाज़ न आऊँगा, तू करम का हाथ बढ़ाए जाजो तेरे करम से है आशना, उसी आशना का सलाम लो

तेरे आस्ताँ की तलाश में, तेरी जुस्तुजू के ख़याल मेंजो लुटा चुका है मता'-ए-दिल, उसी बे-नवा का सलाम लो

कोई मर रहा है बहिश्त पर, कोई चाहता है नजात कोमैं तुझी को चाहूँ ख़ुदा करे, मेरी इस वफ़ा का सलाम लो

तेरे ग़म ने मुझ को पनाह दी, तेरे ग़म से मुझ को है वासितामेरे आँसुओं की ज़बान से दिल-ए-ग़म-नवा का सलाम लो

मेरी हाज़री हो मदीने में, मिले लुत्फ़ मुझ को भी जीने मेंतेरा नूर हो मेरे सीने में, मेरी इस दु'आ का सलाम लो

वो हुसैन जिस ने छिड़क के ख़ूँ चमन-ए-वफ़ा को हरा कियाउसी जाँ-निसार का वासिता, कि हर इक गदा का सलाम लो

यही रोज़-ओ-शब है दु'आ-ए-दिल, कि मरुँ तो तेरे दयार मेंयही मुद्द'आ-ए-हयात है, इसी मुद्द'आ का सलाम लो

तमाम औलिया के बुलंद सर हैं क़दम पे जिन के झुके हुएउसी प्यारे ग़ौस का वासिता, कि हर इक गदा का सलाम लो

वो स'ईद ख़स्ता-ओ-बे-नवा, वो क़तील तेग़-ए-फ़िराक़ काजिसे शौक़ है तेरी दीद का, उसी ग़म-ज़दा का सलाम लो

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