नात लिरिक्स

Ai Dushman-e-Deen Tune Kis Qaum Ko Lalkaara | Le Ham Bhi Hain Saf-aara

ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकारा | ले हम भी हैं सफ़-आरा

नात ख़्वान: शाहिद ख़त्ताबशायर: हिमायत अली शा'इरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकाराले हम भी हैं सफ़-आरा, ले हम भी हैं सफ़-आरा

आ देख ये बाज़ू, बाज़ू हैं कि तलवारेंसीने हैं जवानों के या आहनी दीवारेंमिल जाती हैं क़दमों से किस तरह से दस्तारेंहम तुझ को दिखा देंगे सौ बार ये नज़्ज़ारा

ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकाराले हम भी हैं सफ़-आरा, ले हम भी हैं सफ़-आरा

जिस राह से आएगा उस राह पे मारेंगेमुड़ कर भी न देखेगा, यूँ नशा उतारेंगेहम मौत की वादी से यूँ तुझ को गुज़ारेंगेइस क़ौम से लड़ने की हिम्मत न हो दोबारा

ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकाराले हम भी हैं सफ़-आरा, ले हम भी हैं सफ़-आरा

इस क़ौम का हर बच्चा अल्लाह का सिपाही हैइस ख़ाक का हर ज़र्रा तक़दीर-ए-इलाही हैइस ख़ित्ते का हर गोशा इक ज़िंदा गवाही हैईमाँ का है गहवारा, ईमाँ का है गहवारा

ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकाराले हम भी हैं सफ़-आरा, ले हम भी हैं सफ़-आरा

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