नात लिरिक्स

Ab Shan-e-Sahaba Pe Main Ashaar Kya Likhun | Jannat Ke Shahsawaron Pe Ashaar Kya Likhun

अब शान-ए-सहाबा पे मैं अशआर क्या लिखूँ | जन्नत के शह-सवारों पे अशआर क्या लिखूँ

शायर: मुहम्मद अतहर जलालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अब शान-ए-सहाबा पे मैं अश'आर क्या लिखूँजन्नत के शह-सवारों पे अश'आर क्या लिखूँ

देते थे जो हर मोड़ पे प्यारे नबी का साथउन ज़िंदा-दिल जवानों पे अश'आर क्या लिखूँ

असहाब सितारे हैं मेरे प्यारे नबी केआक़ा के उन सितारों पे अश'आर क्या लिखूँ

असहाब ने आक़ा पे अपनी जानें वार दींउन जैसे जाँ-निसारों पे अश'आर क्या लिखूँ

शागिर्द उन के सारे ज़माने के वली हैंउन वलियों के सरदारों पे अश'आर क्या लिखूँ

अतहर ! है इरादा कि कुछ अश'आर मैं लिखूँलेकिन मैं ताजदारों पे अश'आर क्या लिखूँ

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