आ'ला हज़रत का जो है दुलारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
मत कहो, आ'ला हज़रत ने क्या दे दियामुस्तफ़ा की गली का पता दे दियाअहले-सुन्नत को इक असलहा दे दियायानी अद्दौलतुल-मक्किया दे दियानज़दियत जिस से है पारा-पारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
चर्खे-इल्मो-अदब का सितारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
मेरा दिल है, जिगर है, मेरी जान हैरहबरी के लिए कंज़े-ईमान हैइल्म की ममलिकत का जो सुल्तान हैवो बरेली का अख़्तर रज़ा खान हैजो कभी भी किसी से न हारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
आ'ला हज़रत का जो है दुलारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
मुझ को शाही महल ना हवेली मिलेअहले-सुन्नत को फैज़े बरेली मिलेमुश्को-अम्बर न चंपा-चमेली मिलेप्यारे अख़्तर की प्यारी हथेली मिलेजिस ने हम सुन्नियों को सवांरावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
आ'ला हज़रत का जो है दुलारावो है ताजु-श्शरीआ हमारा
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