उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zulf teri hui kamand mujhe

ज़ुल्फ़ तेरी हुई कमंद मुझे

زلف تیری ہوئی کمند مجھے

शायर: Faez Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ुल्फ़ तेरी हुई कमंद मुझे
इस में बाँधा है बंद बंद मुझे

ख़ाक सेती सजन उठा के किया
इश्क़ तेरे ने सर-बुलंद मुझे

तेरे ग़म सूँ हुआ हूँ दीवाना
न किया नफ़अ कोई पंद मुझे

नहीं जग बीच और ऐ दिलबर
वस्ल बिन तेरे सूद-मंद मुझे

मैं गिरफ़्तार हूँ तिरे मुख पर
जग में नईं और कुछ पसंद मुझे

'फ़ाएज़' इस तौर से हुआ है मलूल
तूँ जलाता है जियूँ सिपंद मुझे