उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-sabab humse judai na karo

बे-सबब हम से जुदाई न करो

بے سبب ہم سے جدائی نہ کرو

शायर: Faez Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-सबब हम से जुदाई न करो
मुझ से आशिक़ से बुराई न करो

ख़ाकसाराँ को न करिए पामाल
जग में फ़िरऔं सी ख़ुदाई न करो

बे-गुनाहाँ कूँ न कर डालो क़त्ल
आह कूँ तीर-ए-हवाई न करो

एक दिल तुम से नहीं है राज़ी
जग में हर इक सूँ बुराई न करो

महव है 'फ़ाएज़'-ए-शैदा तुम पर
उस से हर लहज़ा बखाई न करो