उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ko kar gaya jangal koi

ज़िंदगी को कर गया जंगल कोई

زندگی کو کر گیا جنگل کوئی

शायर: Zafar Iqbal Zafar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी को कर गया जंगल कोई
ले गया ख़ुशियों का मेरी पल कोई

धँस रहा है हर क़दम मेरा यहाँ
राह में दरपेश है दलदल कोई

कोई कंकर फेंकने वाला नहीं
कैसे फिर हो झील में हलचल कोई

ज़िंदगी थी एक सहरा की तरह
ज़िंदगी को कर गया जल-थल कोई

होश भी अपना नहीं रहता मुझे
कर रहा कितना 'ज़फ़र' पागल कोई