उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ko gham-e-jaanan ke hawale kar dun

ज़िंदगी को ग़म-ए-जानाँ के हवाले कर दूँ

زندگی کو غم جاناں کے حوالے کر دوں

शायर: Urooj Zaidi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी को ग़म-ए-जानाँ के हवाले कर दूँ
जिस का डर है उसी तूफ़ाँ के हवाले कर दूँ

लाओ अब लुत्फ़-ए-बहाराँ में इज़ाफ़े के लिए
आशियाँ जश्न-ए-बहाराँ के हवाले कर दूँ

दामन-ए-‘अक़्ल में ये चैन से रह सकता है
दिल-ए-नादाँ को निगहबाँ के हवाले कर दूँ

ख़्वाब-ए-उम्मीद की ता'बीर मिरा ईमाँ है
क्यों इसे ज़ेहन-ए-परेशाँ के हवाले कर दूँ

दिल के बदले मिरे पहलू में है मौज-ए-लर्ज़ां
क्या इसे दीदा-ए-गिर्यां के हवाले कर दूँ

हर नफ़स में अनल-इंसाँ का है नग़्मा पिंहाँ
मैं इसे साज़-ए-रग-ए-जाँ के हवाले कर दूँ

जो अंधेरा नज़र आता है चराग़ों के तले
क्यों न मैं उस को शबिस्ताँ के हवाले कर दूँ

मुझ से बढ़ कर कोई बद-ज़ौक़ भला क्या होगा
मैं अगर दर्द को दरमाँ के हवाले कर दूँ

उस ने दुनिया को बनाया भी सँवारा भी 'उरूज'
फिर ये सोचा इसे इंसाँ के हवाले कर दूँ