उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-niyazi ki ek shan ban jaiye

बे-नियाज़ी की इक शान बन जाइए

بے نیازی کی اک شان بن جائیے

शायर: Urooj Zaidi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-नियाज़ी की इक शान बन जाइए
मुझ से दानिस्ता अंजान बन जाइए

शरह-ए-हस्ती का उन्वान बन जाइए
मेरा दीं मेरा ईमान बन जाइए

हाए ये बे-ख़ुदी और इस का मआल
अब ख़ुदी के निगहबान बन जाइए

नक़्द-ए-अहल-ए-जहाँ देखने के लिए
कुछ दिनों को परेशान बन जाइए

आदमी से फ़रिश्ता ये इम्काँ सही
आइए आप इंसान बन जाइए

क्या कमी है जो उन से गुज़ारिश करूँ
रंग-ओ-निकहत का तूफ़ान बन जाइए

मुहर-ए-तस्दीक़-ए-किरदार भी है कहीं
आप बनने को ज़ीशान बन जाइए

काएनात और फिर उस का अक्स-ए-जमाल
पेश-ए-आईना हैरान बन जाइए

आ’रिफ़ाना तजाहुल के क़ुर्बां 'उरूज'
फिर ज़रा आप अंजान बन जाइए