उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zinda rahne ka bharam aa ke kahan par TuTa

ज़िंदा रहने का भरम आ के कहाँ पर टूटा

زندہ رہنے کا بھرم آ کے کہاں پر ٹوٹا

शायर: Kaleem Haider Sharar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदा रहने का भरम आ के कहाँ पर टूटा
इक सितारा सा मिरी शह-रग-ए-जाँ पर टूटा

ग़ैर-मुमकिन है मिरी ख़ाक उड़ाता कोई
मैं कि ख़ुद अपनी तबाही के निशाँ पर टूटा

सूद-दर-सूद मुरव्वत मिरी काम आई है
जब मैं इख़्लास की मीज़ान-ए-ज़ियाँ पर टूटा

ज़हर सा फैल चुका है मिरी शिरयानों में
कौन सा हर्फ़ मिरी नोक-ए-ज़बाँ पर टूटा

सिसकियाँ भर के 'शरर' कौन वहाँ रोता था
ख़ेमा-ए-ख़्वाब सर-ए-शाम जहाँ पर टूटा