उर्दू शायरी · ग़ज़ल

iradon ki shikaston par sana-KHwani se pahchana

इरादों की शिकस्तों पर सना-ख़्वानी से पहचाना

ارادوں کی شکستوں پر ثنا خوانی سے پہچانا

शायर: Kaleem Haider Sharar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इरादों की शिकस्तों पर सना-ख़्वानी से पहचाना
ख़ुदाया मैं ने तुझ को कितनी आसानी से पहचाना

कई लोगों ने फलते फूलते पेड़ों से जाना है
मगर मैं ने तुझे सब्ज़े की उर्यानी से पहचाना

मिरे सज्दे इसी दुनिया में मेरे काम आए हैं
मिरे क़ातिल ने मुझ को मेरी पेशानी से पहचाना

कभी देखा कि दिल कैसे सिकुड़ता है ज़रूरत पर
कभी दुनिया को पैसों की फ़रावानी से पहचाना

रग-ओ-पै में दर आता है 'शरर' हर शेर का नश्शा
ग़ज़ल को बारहा तरतीब-ए-जिस्मानी से पहचाना