उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zinda hain mere KHwab ye kab yaad hai mujhko

ज़िंदा हैं मिरे ख़्वाब ये कब याद है मुझ को

زندہ ہیں مرے خواب یہ کب یاد ہے مجھ کو

शायर: Rafique Khayal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदा हैं मिरे ख़्वाब ये कब याद है मुझ को
हाँ तर्क-ए-मोहब्बत का सबब याद है मुझ को

तफ़्सील-ए-इनायात तो अब याद नहीं है
पर पहली मुलाक़ात की शब याद है मुझ को

ख़ुश्बू की रिफ़ाक़त का नशा टूट रहा है
लेकिन वो सफ़र दाद-तलब याद है मुझ को

अब शाम के हाथों जो गिरफ़्तार है सूरज
दोपहर में था क़हर-ओ-ग़ज़ब याद है मुझ को

ऐवान मिरी रूह के रौशन किए जिस ने
वो शोख़ी-ए-यक-जुम्बिश-ए-लब याद है मुझ को

कुछ दिन से मुक़य्यद हूँ मैं वीराना-ए-जाँ में
हालाँकि कोई शहर-ए-तरब याद है मुझ को

क्यूँ याद दिलाते हो मुझे चाँदनी रातें
पैमान-ए-वफ़ा तुम से है सब याद है मुझ को

वो शख़्स 'ख़याल' आज जो रू-पोश है मुझ में
थे उस में कमालात अजब याद है मुझ को