उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zist tujh bin guzar dunga main

ज़ीस्त तुझ बिन गुज़ार दूँगा मैं

زیست تجھ بن گزار دوں گا میں

शायर: Danish Ejaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ीस्त तुझ बिन गुज़ार दूँगा मैं
ख़्वाहिशों को भी मार दूँगा मैं

यूँ भी ये ज़िंदगी तो फ़ानी है
तेरा सदक़ा उतार दूँगा मैं

जानता हूँ सुनी न जाएगी
पर सदा बार बार दूँगा मैं

तेरी रुस्वाई का न डर हो अगर
सर-ए-महशर पुकार दूँगा मैं

सारी दुनिया की ने'मतें 'दानिश'
तिरी मुस्काँ पे वार दूँगा मैं