उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaKHm khate hain aur muskuraate hain hum

ज़ख़्म खाते हैं और मुस्कुराते हैं हम

زخم کھاتے ہیں اور مسکراتے ہیں ہم

शायर: A G Josh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ख़्म खाते हैं और मुस्कुराते हैं हम
हौसला अपना ख़ुद आज़माते हैं हम

आ लगा है किनारे सफ़ीना मगर
शोर तो आदतन ही मचाते हैं हम

हम जो डूबें तो कोई न फिर बच सके
ऐसा सागर में तूफ़ाँ उठाते हैं हम

चूर कर भी चुके दिल के शीशे को वो
अपनी हिम्मत है फिर चोट खाते हैं हम

बे-रुख़ी से जो दिल तोड़ देते हैं 'जोश'
उन के ही प्यार के गीत गाते हैं हम