उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chandni-raat mein andhera tha

चाँदनी-रात में अंधेरा था

چاندنی رات میں اندھیرا تھا

शायर: A G Josh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँदनी-रात में अंधेरा था
इस तरह बेबसी ने घेरा था

मेरे घर में बसी थी तारीकी
घर से बाहर मगर सवेरा था

वो किसी और का हुआ है आज
वो जो कल तक तो सिर्फ़ मेरा था

उड़ गए आस के सभी पंछी
जिन का दिल में मिरे बसेरा था

बस वहीं 'जोश' का मज़ार है आज
कल जहाँ बेवफ़ा का डेरा था