उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zahr piye madhosh andheri raat

ज़हर पिए मदहोश अँधेरी रात

زہر پیے مدہوش اندھیری رات

शायर: Badnam Nazar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़हर पिए मदहोश अँधेरी रात
नागिन सी ख़ामोश अँधेरी रात

दिन की सूरत मुझ को भी खा जा आ कर
मैं भी हूँ बेहोश अँधेरी रात

शहरों में ख़ामोशी ही ख़ामोशी थी
तूफ़ाँ था पुर-जोश अँधेरी रात

क्या जाने किस ने ओढ़ा मेरा पैकर
मैं ख़्वाब-ए-ख़रगोश अँधेरी रात

चाँदी जैसी किरनें मुझ पर मत डालो
मेरा तो सर-पोश अँधेरी रात

नींद कहाँ मेरे घर आएगी 'बदनाम'
मैं ख़ाना-बर-दोश अँधेरी रात