उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaban pe harf-e-shikayat are maaz-allah

ज़बाँ पे हर्फ़-ए-शिकायत अरे मआज़-अल्लाह

زباں پہ حرف شکایت ارے معاذ اللہ (ردیف .. م)

शायर: Hadi Machlishahri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़बाँ पे हर्फ़-ए-शिकायत अरे मआज़-अल्लाह
मुझे तिरे सितम-ए-सब्र-आज़मा की क़सम

बस इक निगाह-ए-करम का उमीद-वार हूँ मैं
जफ़ा-शिआर तुझे मेरी इल्तिजा की क़सम

तू है बहार तो दामन मिरा हो क्यूँ ख़ाली
इसे भी भर दे गुलों से तुझे ख़ुदा की क़सम

ग़ज़ब की छेड़ है 'हादी' ये और क्या कहिए
वो खा रहे हैं मिरे तर्क-ए-मुद्दआ की क़सम