उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khoya hua sa rahta hun aksar main ishq mein

खोया हुआ सा रहता हूँ अक्सर मैं इश्क़ में

کھویا ہوا سا رہتا ہوں اکثر میں عشق میں

शायर: Hadi Machlishahri3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खोया हुआ सा रहता हूँ अक्सर मैं इश्क़ में
या यूँ कहो कि होश में आने लगा हूँ मैं

ये इब्तिदा-ए-शौक़ की हालत न हो कहीं
महफ़िल में उस से आँख चुराने लगा हूँ मैं

अब क्यूँ गिला रहेगा मुझे हिज्र-ए-यार का
बे-ताबियों से लुत्फ़ उठाने लगा हूँ मैं