उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main kya hun kaun hun ye bhi KHabar nahin mujhko

मैं क्या हूँ कौन हूँ ये भी ख़बर नहीं मुझ को

میں کیا ہوں کون ہوں یہ بھی خبر نہیں مجھ کو (ردیف .. ن)

शायर: Hadi Machlishahri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं क्या हूँ कौन हूँ ये भी ख़बर नहीं मुझ को
वो इस तरह मिरी हस्ती पे छाए जाते हैं

ख़याल ही अभी आया था कू-ए-जानाँ का
ये हाल है कि क़दम डगमगाए जाते हैं

वो पूछते हैं दिल-ए-मुब्तला का हाल और हम
जवाब में फ़क़त आँसू बहाए जाते हैं

कहाँ है शौक़ बता ग़ैरत-ए-कशिश तेरी
वो मेरी ख़ाक से दामन बचाए जाते हैं

मिटा रहे हैं वो क्यूँ दाग़-हा-ए-दिल 'हादी'
चराग़ क्यूँ ये जला कर बुझाए जाते हैं